Tuesday, 6 August 2019

All about article 370 & 35 A|| धारा 370 खत्म करने के लिए मोदी और अमित शाह का मास्टरमाइंड प्लान||

All about article 370 & 35 A


    पिछले 5 दिनों से अचानक से अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए बढ़ाई गई सैनिकों की संख्या एवं एनएसजी फोर्स और सिक्योरिटी कारणों को देखते हुए पूरे देश में एक माहौल बन चुका था कि देश में कश्मीर में कुछ बड़ा होने वाला है लेकिन वह क्या है, यह किसी को पता तक नहीं था और आज जो हुआ उसने सबको चौंका दिया। किसी ने अनुमान नहीं लगाया था कि ऐसा भी कुछ हो सकता है लेकिन आज स्वतंत्रता दिवस से 10 दिन पहले यह महान कार्य हो गया और अब हम भारत को लगभग स्वतंत्र कह सकते हैं क्योंकि अभी भी कुछ कार्य शेष हैं।

गृह मंत्री अमित शाह का भाषण:-


       आज जब राज्यसभा में अमित शाह जो कि भारत के केंद्रीय गृह मंत्री है, वह जब अपना भाषण दे रहे थे तब जो लोग उन्हें सुन रहे थे लेकिन वे उस पर भरोसा नहीं कर पा रहे थे क्योंकि वास्तव में यह असंभव सा प्रतीत होता है लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार ने उसे संभव कर दिखाया है। यह सब पूरा कैसे हुुुआ? गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि राजस्थान व गुजरात में भी पाकिस्तान की सीमाएं लगती है लेकिन वहां का युवा पत्थरबाजी नहीं करता है। उन्होंने कहा कि उड़ीसा का युवा क्यों नहीं गुमराह होता है  या फिर किसी और प्रदेश का युवा क्यों नही और उसके बाद फिर भी उन्होंनेे कहा कि ऐसा इसलिए है कि क्योंकि वहां पर अलगाववाद का कोई भूत नहीं है। उन्होंनेे कहा कि आखिर कश्मीर को क्योंं 18वीं शताब्दी में जीने देना चाहिए और जो लोग उनको बरगलाते हैं उनकेे बच्चे लंदन और अमेरिका में पढ़ते हैं।
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       उन्होंने राज्य सभा से पूछा कि आखिरकार संसद में पारित हुए कानून क्या वहां पर प्रभावी होते हैं? गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा दिए गए भाषण के पश्चात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रकार से ट्वीट किया:-
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ट्वीट

        कश्मीर पर किसका राज्य था, कौन कश्मीर को अपने अधीन किए हुए थे? यह परिवारवाद पर आधारित पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी राजनीति एवं सार्थक को चमकाने के लिए जाने वाली तीन पार्टियां है जिनके चेहरे अब्दुल और महबूबा के साथ कांग्रेस के रूप में हम सब जानते हैं। यही 3 अब तक कश्मीर पर शासन करते आए हैं लेकिन आज अमित शाह के द्वारा किए गए ऐलान के बाद उनके पास उनके हाथों में कुछ नहीं रह जाएगा क्योंकि अब देश का कोई भी नागरिक वहां रह सकेगा, वहां पर जमीन खरीद सकेगा, वहां पर नौकरी कर सकेगा या अपना व्यापार कर सकेगा। निश्चित रूप से पर्यटन और होटल बिजनेस में वहां पर प्राइवेट सेक्टर का प्रवेश होगा क्योंकि इससे पहले वहां पर होटल खोलना या व्यापार स्थापित करना बहुत मुश्किल काम था क्योंकि वहां पर बहुत से प्रतिबंध लगे हुए हैं। उदाहरण के लिए जमीन ना खरीद पाना या फिर विधानसभा का अधिक शक्तिशाली होना लेकिन अब दूसरे राज्यों के लोग भी वहां पर जाकर अपना व्यापार फैला सकेंगे। वहां पर पर रोजगार बढ़ेगा, गरीबी कम होगी, आतंकवाद की कमर टूट जाएगी और आतंकवाद में बहुत भारी कमी आएगी, पत्थरबाजी बंद होगी क्योंकि युवाओं को रोजगार और शिक्षा दोनों ही मिलना शुरू हो जाएगा। उनके हाथ में पत्थर के बजाय किताबें और लैपटॉप या ऐसा ही कुछ रचनात्मक आपको भी दिखेगा। यह  अभी भले न हो लेकिन दूरगामी परिणाम जरूर बनेंगे कि वहां पर सेना का खर्च और संख्या धीरे-धीरे कम हो जिससे कि अन्य कार्य पर ध्यान दिया जा सके और तेजी से विकास कार्य किए जा सकें क्योंकि लद्दाख कश्मीर से अलग हो जाएगा, इसलिए उसका विकास बहुत अधिक तेजी से होगा क्योंकि घाटी के तथाकथित नेता लोग लद्दाख  पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते थे क्योंकि वह बेड वोट बैंक नहीं है।कश्मीर के विलय से लेकर आज तक रिकॉर्ड रहा है कि वहां का मुख्यमंत्री कश्मीर घाटी से ही हुआ है और यही कारण है कि वे लोग न तो जम्मू पर ध्यान देते थे और ना ही लद्दाख पर और जो थोड़ा-बहुत कश्मीर पर ध्यान देते हुए थे तो वह सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने का प्रयास करते थे। 

धारा 370 खत्म करने के लिए गए प्रयास:-

      आज के दिन आपको यह भी पता होना चाहिए कि जब आतंकवादियों ने घोषणा की थी कि वहां पर तिरंगा नहीं फहराया जाएगा, तब मुरली मनोहर जोशी के साथ आज के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी ने कश्मीर के लाल चौक पर भारत का तिरंगा फहरा कर सीधा चैलेंज स्वीकार कर लिया था और उन्हें बता दिया था कि भारत का भविष्य कैसा होगा, कश्मीर कैसा होगा... यह घटना 1992 की है जब श्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता के रूप में आतंकवादियों की चुनौती को स्वीकार करते हुए और उन्हें चुनौती देते हुए कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा झंडा फहराया था और वहां से सफर तय करते हुए आज कश्मीर को भारत में पूर्ण विलय कर लिया और कश्मीर और भारत का झंडा एक हो गया है। हमारा अपना तिरंगा झंडा अब एक झंडा ही मान्य होगा। आप उनकी इच्छा शक्ति का प्रतीक भी मान सकते हैं और दूरदर्शिता का भी अनुमान लगा सकते हैं। धारा 370 के संदर्भ में विपक्षी दलों की मान्यता यह थी कि सरकार  कम से कम पहले उसे संसद में पेश करेगी और उसके पास संविधान संसोधन के द्वारा उसमें कुछ परिवर्तन किए जाएंगे और ऐसा विपक्षियों ने सोचा था कि संविधान संशोधन होने नहीं देंगे लेकिन कौटिल्य बुद्धि वाले गृह मंत्री अमित शाह ने पूरी बाजी पलट दी।  दरअसल  समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव  प्रश्न किया कि आखिरकार बिना संसद की  अनुमति के भला और बिना संविधान संशोधन के  किस प्रकार से  यह परिवर्तन किया गया है तब उन्होंने  बताया कि धारा 370 के तीसरे भाग के अनुसार ऐसी व्यवस्था थी कि  उसे राष्ट्रपति की  हस्ताक्षर के द्वारा  घोषणा से  परिवर्तित किया जा सकता था और ऐसा कांग्रेस दो बार उसी धारा का प्रयोग करके कर चुकी थी। एक बार 1952 में और दूसरी बार 1962 में और उसे एक बार का प्रयोग करते हुए अबकी बार अमित शाह ने उसको पूरा ही बदल दिया और ऐसा आप कह सकते हैं कि धारा 370 पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है सिवाय धारा 370 के खंड एक को छोड़कर क्योंकि  उसके अनुसार  कश्मीर भारत का अखंड  एवं अभिन्न अंग है। धारा 370 ऐसा लगता था कि जैसे भारत का वह भाग भी अभी भी गुलामी में जी रहा है, ऐसा इसलिए नहीं कि भारत की संसद का उसपर पूर्णतया नियंत्रण नहीं है बल्कि इसलिए भी है कि वह विकास में बहुत अधिक पीछे हो गया है। 

कैसा होगा जम्मू कश्मीर और लद्दाख का राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र

       आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि वहां की जनसंख्या जम्मू कश्मीर की जनसंख्या 12500000 के आसपास है मतलब कि भारत की कुल जनसंख्या का 1% भी नहीं है लेकिन भारत के द्वारा जारी बजट में उसका लगभग 10% से अधिक योगदान होता है। आपके लिए एक और हैरानी की बात बता दें कि इसमें भी उसका योगदान भारत के लिए लगभग 1% से भी कम है। आज जो बिल राज सभा में अमित शाह ने पेश किया है, वह जम्मू कश्मीर की राजनीति को भी बहुत प्रभावित करेगा जिसमें से पहला बिंदु यह है कि अब सीटों की संख्या 107 से बढ़ाकर 114 कर दी गई है जिसमें से कुछ सीटें sc-st के लिए भी आरक्षित हो जाएंगी। आपको बता दें कि 114 सीटों में से 24 सीटें पीओके यानी कि पाकिस्तान के द्वारा कब्जे में लिए गए कश्मीर की है। अब जम्मू कश्मीर की विधानसभा की समय सीमा को 6 वर्ष से घटाकर केवल 5 वर्ष कर दिया गया है इससे पहले जम्मू में 37 और कश्मीर में 46 सीटें थी लद्दाख की ओर 4 सीटें थी लेकिन अब चुनाव आयोग भी इस पर विचार करेगा और संभवतः इन सीटों में भी परिवर्तन किया जाएगा यदि  चुनाव आयोग  राज्य की सीटों का बंटवारा नए सिरे से करेगा तो निश्चित रूप से राजनीति प्रभावित होगी। आप को समझाने के लिए ज़ी न्यूज़ पर डीएनए मैं दिखाए गए  चित्र को आपके लिए प्रस्तुत कर रहा हूं
आपको एक बार फिर से याद दिला दें जम्मू कश्मीर और लद्दाख को मिलाकर एक बड़ा क्षेत्र तैयार होता है लेकिन हमेशा से मुख्यमंत्री वही होता है जो कश्मीर घाटी में पैदा हुआ होता है क्योंकि यहीं से पूरे जम्मू कश्मीर राजनीति संचालित की जाती है, चाहे में अब्दुल्ला परिवार हो या फिर महबूबा मुफ्ती का परिवार हो या फिर कुछ खुद कांग्रेस ही क्यों ना हो लेकिन अब कश्मीर और भारत का एक झंडा होगा। 
।।जय हिंद।।

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